NCERT अवधारणा अभ्यास · कक्षा 10 · विज्ञान
मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार
अवधारणा समझें
मानव नेत्र में कॉर्निया और नेत्र-लेंस प्रकाश को रेटिना पर केंद्रित करते हैं। सिलियरी पेशियाँ लेंस की वक्रता बदलकर अलग-अलग दूरियों पर फोकस करने में मदद करती हैं; इसे समंजन कहते हैं। प्रतिबिंब रेटिना पर वास्तविक और उल्टा बनता है, जिसे मस्तिष्क समझता है। निकट-दृष्टि दोष में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है और अवतल लेंस से सुधार होता है; दूर-दृष्टि में निकट वस्तु का प्रतिबिंब पीछे बनता है और उत्तल लेंस उपयोगी है। प्रिज्म में वर्ण-विक्षेपण, वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकाश का प्रकीर्णन रंगों के कई दैनिक दृश्य समझाते हैं।
याद रखने योग्य बातें
- सामान्य आँख का निकट बिंदु लगभग 25 cm और दूर बिंदु अनंत माना जाता है।
- निकट-दृष्टि (मायोपिया): दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं; सुधार के लिए उपयुक्त क्षमता का अवतल लेंस।
- दूर-दृष्टि (हाइपरमेट्रोपिया): पास की वस्तु स्पष्ट नहीं; सुधार के लिए उत्तल लेंस।
- सफेद प्रकाश का प्रिज्म से रंगों में बँटना वर्ण-विक्षेपण है; वायुमंडल में छोटी तरंगदैर्घ्य का प्रकीर्णन अधिक होता है।
पूरा हल किया उदाहरण
प्रश्न: किसी व्यक्ति का दूर बिंदु 2 m है। उसे अनंत पर स्थित वस्तु स्पष्ट देखने के लिए आवश्यक चश्मे के लेंस की क्षमता निकालिए।
- अनंत पर वस्तु का प्रतिबिंब आँख के दूर बिंदु पर, यानी चश्मे से 2 m आगे बनना चाहिए।
- चश्मे के लिए u=−∞ और v=−2 m (उसी ओर आभासी प्रतिबिंब); 1/f=1/v−1/u।
- 1/f=−1/2−0=−0.5 m⁻¹, इसलिए f=−2 m।
- क्षमता P=1/f (मीटर में)=−0.5 D।
उत्तर: −0.5 डायॉप्टर का अवतल लेंस।
इन गलतियों से बचें
- निकट-दृष्टि और दूर-दृष्टि के सुधारक लेंस उलट देना।
- आकाश नीला होने को वायुमंडलीय अपवर्तन कहना; यह मुख्यतः कम तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन है।
आधिकारिक स्रोत
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