यूपी बोर्ड · कक्षा 10 · सत्र 2026–27
गणित और विज्ञान, अध्याय के क्रम में
आधिकारिक पाठ्यक्रम में दिए गए सभी 28 गणित-विज्ञान विषयों पर हिंदी में छोटा पाठ, हल किया उदाहरण, सामान्य गलतियाँ और आठ मौलिक प्रश्न। अपनी तैयारी किसी भी विषय से शुरू करें।
दायरा: ये संक्षिप्त अभ्यास-पाठ हैं। पूरा पाठ्यक्रम, निर्धारित पुस्तक और परीक्षा की शर्तें नीचे दिए UPMSP PDF से जाँचें। प्रश्न BodhiScore के बनाए हुए हैं, बोर्ड के पुराने प्रश्नपत्र नहीं।
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कक्षा 10 गणित
UPMSP की इकाइयों और विषयों के क्रम में पढ़ें। 2026–27 का आधिकारिक गणित पाठ्यक्रम PDF ↗
संख्या पद्धति
UPMSP 2026–27 के संख्या पद्धति विषय में अंकगणित का मौलिक प्रमेय और √2, √3, √5 जैसी संख्याओं की अपरिमेयता का अध्ययन है। मौलिक प्रमेय के अनुसार 1 से बड़ी हर पूर्ण संख्या का अभाज्य गुणनखंडन क्रम को छोड़कर अद्वितीय है। अपरिमेय संख्या को दो पूर्णांकों के अनुपात p/q में नहीं लिखा जा सकता।
बीजगणित
बहुपद p(x) के शून्यक वे x मान हैं जिन पर p(x)=0 होता है। द्विघात बहुपद ax²+bx+c (a≠0) के शून्यक α और β हों, तो α+β=−b/a तथा αβ=c/a। इन संबंधों से गुणांक और शून्यकों के बीच संबंध समझा और जाँचा जा सकता है।
दो रैखिक समीकरणों का हल वह (x,y) युग्म है जो दोनों को संतुष्ट करे। आलेख पर हल दोनों रेखाओं का प्रतिच्छेद है। समीकरणों को a₁x+b₁y+c₁=0 और a₂x+b₂y+c₂=0 लिखें; प्रत्येक में x और y के गुणांक एक साथ शून्य नहीं होने चाहिए। नीचे दिए गुणनफलों की तुलना से शून्य से भाग दिए बिना हल की स्थिति जानी जा सकती है।
ax²+bx+c=0 (a≠0) द्विघात समीकरण है। इसके मूल वे x मान हैं जो समीकरण को सत्य करें। गुणनखंडन, पूर्ण वर्ग या द्विघात सूत्र से मूल निकाले जा सकते हैं। विविक्तकर D=b²−4ac मूलों की प्रकृति बताता है।
समांतर श्रेढ़ी (AP) में लगातार पदों का अंतर स्थिर रहता है। प्रथम पद a और सार्व अंतर d हो, तो nवाँ पद aₙ=a+(n−1)d है। पहले n पदों का योग Sₙ=n/2[2a+(n−1)d] होता है। UPMSP पाठ्यक्रम nवें पद की व्युत्पत्ति, प्रथम n पदों के योग और दैनिक जीवन के अनुप्रयोग निर्दिष्ट करता है।
निर्देशांक ज्यामिति
निर्देशांक ज्यामिति में बिंदु (x,y) को दो परस्पर लंब अक्षों पर दर्शाते हैं। दो बिंदुओं के बीच दूरी पाइथागोरस प्रमेय से मिलती है। आंतरिक रूप से m₁:m₂ अनुपात में विभाजित करने वाले बिंदु के निर्देशांक भारित औसत से निकाले जाते हैं। आधिकारिक पाठ्यक्रम में अवधारणा, रैखिक समीकरणों के आलेख, दूरी सूत्र और आंतरिक विभाजन सूत्र हैं।
ज्यामिति
समरूप त्रिभुजों के संगत कोण बराबर और संगत भुजाएँ समान अनुपात में होती हैं। यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा अन्य दो भुजाओं को काटे, तो वह उन भुजाओं को समान अनुपात में विभाजित करती है; इसका विलोम भी लागू होता है। पाठ्यक्रम समरूपता और इन परिणामों के उदाहरण निर्दिष्ट करता है।
वृत्त की स्पर्श रेखा वृत्त को एक बिंदु पर छूती है। स्पर्श बिंदु से केंद्र तक खींची त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लंब होती है। किसी बाहरी बिंदु से वृत्त पर खींची गई दोनों स्पर्श रेखाओं की लंबाइयाँ बराबर होती हैं। आधिकारिक पाठ्यक्रम स्पर्श रेखा, स्पर्श बिंदु से त्रिज्या पर लंबता और बाहरी बिंदु से खींची स्पर्श रेखाओं की समान लंबाई शामिल करता है।
त्रिकोणमिति
समकोण त्रिभुज में किसी तीव्र कोण θ के लिए sinθ=लंब/कर्ण, cosθ=आधार/कर्ण और tanθ=लंब/आधार। कोण बदलने पर अनुपात बदलते हैं, भुजाओं का माप समान गुणक से बदलने पर अनुपात नहीं बदलता। पाठ्यक्रम 0°, 30°, 45°, 60°, 90° के मान और अनुपातों के संबंध निर्दिष्ट करता है।
सर्वसमिका वह समानता है जो निर्धारित कोणों के लिए सत्य रहती है। मूल संबंध sin²θ+cos²θ=1 से भाग देकर 1+tan²θ=sec²θ तथा 1+cot²θ=cosec²θ प्राप्त होते हैं। UPMSP इन सर्वसमिकाओं को 0°≤θ<90° के लिए सिद्ध करने और लागू करने को कहता है।
ऊँचाई और दूरी के प्रश्नों में दृष्टि रेखा, क्षैतिज रेखा और ऊर्ध्वाधर वस्तु से समकोण त्रिभुज बनता है। उन्नयन कोण क्षैतिज से ऊपर देखने का कोण और अवनमन कोण क्षैतिज से नीचे देखने का कोण है। ज्ञात दूरी व कोण से tanθ=ऊँचाई/क्षैतिज दूरी का उपयोग किया जाता है। UPMSP के अनुसार प्रश्न सरल हों, अधिकतम दो समकोण त्रिभुज हों और कोण 30°, 45° या 60° हों।
क्षेत्रमिति
वृत्त के त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल पूरे वृत्त के क्षेत्रफल का θ/360 भाग है। चाप की लंबाई भी पूरी परिधि का वही अनुपात है। यहाँ θ केंद्र कोण है। आधिकारिक पाठ्यक्रम वृत्त के त्रिज्यखंड और वृत्तखंड के क्षेत्रफल शामिल करता है; वृत्तखंड का क्षेत्रफल संबंधित त्रिज्यखंड से त्रिभुज का क्षेत्रफल घटाकर मिलता है।
ठोसों का पृष्ठीय क्षेत्रफल बाहरी सतह का कुल क्षेत्रफल है और आयतन उनके द्वारा घेरा गया स्थान है। घन, घनाभ, गोला, अर्धगोला और लंबवृत्तीय बेलन/शंकु के सूत्र लागू होते हैं। UPMSP दो समतलीय आकृतियों से बने ठोस तथा अधिकतम दो अलग ठोसों के संयोजन वाले मिश्रित प्रश्न निर्दिष्ट करता है।
सांख्यिकी और प्रायिकता
समूहित आँकड़ों के माध्य, माध्यिका और बहुलक से केंद्रीय प्रवृत्ति का वर्णन होता है। वर्गीकृत आँकड़ों में माध्य के लिए वर्ग-चिह्न और आवृत्तियाँ उपयोग की जाती हैं। माध्यिका वर्ग वह वर्ग है जहाँ संचयी आवृत्ति पहली बार कुल आवृत्ति के आधे तक पहुँचती या उससे आगे जाती है।
सैद्धांतिक प्रायिकता किसी घटना के अनुकूल परिणामों की संख्या और सभी समान संभावित परिणामों की संख्या का अनुपात है। घटना की प्रायिकता 0 और 1 के बीच रहती है। किसी घटना E के न होने की प्रायिकता P(Ē)=1−P(E) होती है। पाठ्यक्रम सैद्धांतिक परिभाषा और एकल घटना पर सामान्य प्रश्न रखता है।
कक्षा 10 विज्ञान
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रासायनिक पदार्थ: प्रकृति और व्यवहार
रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक नए पदार्थों यानी उत्पादों में बदलते हैं। समीकरण संतुलित करने का अर्थ दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या बराबर करना है। संतुलन द्रव्यमान संरक्षण को दर्शाता है; सूत्रों के नीचे के अंक नहीं बदले जाते।
जलीय विलयन में अम्ल H⁺ आयन (वास्तव में H₃O⁺) देते हैं, जबकि क्षारक OH⁻ आयन देते हैं। अम्ल और क्षारक संकेतकों के रंग बदलते हैं और परस्पर अभिक्रिया करके लवण तथा जल बना सकते हैं। pH पैमाना किसी विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति बताता है: 7 से कम अम्लीय, 7 तटस्थ और 7 से अधिक क्षारीय। दैनिक जीवन में pH का महत्व दाँतों के क्षय, मिट्टी तथा पाचन में दिखता है। सामान्य नमक NaCl से सोडियम हाइड्रॉक्साइड, विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा और धावन सोडा तैयार किए जा सकते हैं; प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम से बनाया जाता है।
धातुएँ सामान्यतः चमकीली, तन्य, आघातवर्धनीय तथा ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुओं में प्रायः इसके विपरीत गुण मिलते हैं, हालांकि अपवाद भी हैं। धातु इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं और अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन; इनके आकर्षण से आयनिक यौगिक बनता है। धातुओं की अभिक्रियाशीलता अलग-अलग होती है। अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है। अयस्क से धातु निकालने, धातुकर्म की मूल विधियों और संक्षारण से बचाव का संबंध इन्हीं गुणों से है।
कार्बन चार सहसंयोजक बंध बना सकता है और अपने ही परमाणुओं से लंबी शृंखलाएँ भी बना सकता है; इस कारण कार्बन यौगिकों की संख्या बहुत बड़ी है। संतृप्त हाइड्रोकार्बन में कार्बन-कार्बन एकल बंध, जबकि असंतृप्त यौगिकों में द्वि या त्रि बंध होता है। समजातीय श्रेणी में क्रमागत सदस्यों का अंतर –CH₂– होता है। क्रियात्मक समूह यौगिकों के विशिष्ट रासायनिक गुण तय करते हैं। पाठ्यक्रम में हाइड्रोकार्बनों के अंतर, दहन, ऑक्सीकरण, योग और प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ, तथा एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल, साबुन और अपमार्जक शामिल हैं।
जैव जगत
जीवों को जीवन बनाए रखने के लिए पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसे प्रक्रम चाहिए। पोषण से पदार्थ और ऊर्जा मिलती है; श्वसन भोजन के अणुओं से उपयोगी ऊर्जा मुक्त करता है। पौधों में प्रकाश संश्लेषण, जबकि मनुष्यों में पाचन तंत्र भोजन को सरल, अवशोषित होने योग्य पदार्थों में बदलता है।
बहुकोशिकीय जीवों में उद्दीपन पहचानना और उचित प्रतिक्रिया देना समन्वय का काम है। पौधों में प्रकाश या गुरुत्व जैसे उद्दीपनों की दिशा में वृद्धि को अनुवर्तन कहते हैं; ऑक्सिन जैसे पादप हार्मोन वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। जंतुओं में तंत्रिका तंत्र विद्युत-रासायनिक संकेतों से तेज प्रतिक्रिया कराता है, जबकि हार्मोन रक्त द्वारा पहुँचकर अपेक्षाकृत धीमे और लंबे समय तक प्रभाव डालते हैं। प्रतिवर्ती क्रिया में मेरुरज्जु त्वरित प्रतिक्रिया का मार्ग बनाती है; मस्तिष्क सूचना पा सकता है, पर प्रतिक्रिया के लिए हर बार पहले सचेत निर्णय जरूरी नहीं।
जनन से प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है। अलैंगिक जनन में सामान्यतः एक जनक से बिना युग्मक-संलयन के संतान बनती है; द्विखंडन, मुकुलन, खंडन और बीजाणु निर्माण इसके रूप हैं। लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का संलयन आनुवंशिक विविधता का स्रोत बनता है। पौधों में परागण के बाद निषेचन होता है और बीज बनता है। मानव प्रजनन स्वास्थ्य में किशोरावस्था, गर्भनिरोध के तरीके, सुरक्षित यौन व्यवहार, HIV/AIDS से बचाव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संबंधी मूल बातें शामिल हैं।
आनुवंशिकता में माता-पिता के लक्षण संतानों तक पहुँचते हैं। जीन DNA के खंड हैं जो लक्षणों से जुड़े निर्देश रखते हैं; जीन गुणसूत्रों पर होते हैं। लैंगिक जनन के दौरान प्रत्येक जनक से जीनों का एक-एक सेट आता है, इसलिए संतान में समानता के साथ विविधता भी होती है। मेंडल ने मटर के पौधों से प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों के वंशागमन के नियम समझाए। मनुष्य में लिंग-निर्धारण में माता का अंडाणु X गुणसूत्र देता है, जबकि पिता का शुक्राणु X या Y दे सकता है।
प्राकृतिक घटनाएँ
प्रकाश किरण चिकनी सतह से लौटे तो परावर्तन होता है; आपतन कोण और परावर्तन कोण अभिलंब से मापे जाते हैं और बराबर होते हैं। गोलाकार दर्पणों में वक्रता केंद्र C, मुख्य अक्ष और मुख्य फोकस F से प्रतिबिंब की स्थिति समझते हैं। दो माध्यमों की सीमा पार करते समय प्रकाश की चाल बदलने से किरण मुड़ सकती है; इसे अपवर्तन कहते हैं। लेंस भी अपवर्तन से प्रतिबिंब बनाते हैं। दर्पण और लेंस सूत्र, आवर्धन और लेंस की क्षमता इन स्थितियों का परिमाणात्मक वर्णन करते हैं।
मानव नेत्र में कॉर्निया और नेत्र-लेंस प्रकाश को रेटिना पर केंद्रित करते हैं। सिलियरी पेशियाँ लेंस की वक्रता बदलकर अलग-अलग दूरियों पर फोकस करने में मदद करती हैं; इसे समंजन कहते हैं। प्रतिबिंब रेटिना पर वास्तविक और उल्टा बनता है, जिसे मस्तिष्क समझता है। निकट-दृष्टि दोष में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है और अवतल लेंस से सुधार होता है; दूर-दृष्टि में निकट वस्तु का प्रतिबिंब पीछे बनता है और उत्तल लेंस उपयोगी है। प्रिज्म में वर्ण-विक्षेपण, वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकाश का प्रकीर्णन रंगों के कई दैनिक दृश्य समझाते हैं।
विद्युत का प्रभाव
विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है। किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर धारा चलाने वाली ऊर्जा प्रति इकाई आवेश बताता है। ओम के नियम के अनुसार स्थिर ताप पर V और I समानुपाती हैं; प्रतिरोध चालक के पदार्थ, लंबाई और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।
विद्युत धारा बहने पर चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनता है। सीधे तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ वृत्ताकार होती हैं और दिशा दायाँ हाथ अंगूठा नियम से मिलती है। कुंडली या परिनालिका का क्षेत्र दंड चुंबक जैसा हो सकता है। चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है; फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम बल की दिशा बताता है। घरेलू परिपथ में फ्यूज/MCB, अर्थ तार और जीवित-तटस्थ तार सुरक्षा के लिए हैं।
प्राकृतिक संसाधन
पारितंत्र में जीव और उनका अजैविक परिवेश परस्पर क्रिया करते हैं। उत्पादक सूर्य की ऊर्जा से भोजन बनाते हैं; उपभोक्ता भोजन-श्रृंखला के अलग पोषण स्तरों पर रहते हैं और अपघटक मृत पदार्थ को सरल पदार्थों में लौटाते हैं। ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है और हर स्तर पर उसका बड़ा भाग ऊष्मा के रूप में उपलब्ध नहीं रहता, इसलिए खाद्य श्रृंखला सीमित रहती है। जैव-निम्नीकरणीय पदार्थ सूक्ष्मजीवों से टूटते हैं, जबकि कुछ अजैव-निम्नीकरणीय पदार्थ लंबे समय तक जमा हो सकते हैं। ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण रोकती है; कुछ रसायन उसके क्षय में योगदान करते हैं।
अभ्यास के बाद
गलत प्रश्नों को Play के Mistake Book में दोहराएँ और आधिकारिक मॉडल पेपर से परीक्षा का स्वरूप देखें।