NCERT अवधारणा अभ्यास · कक्षा 10 · विज्ञान
हमारा पर्यावरण
अवधारणा समझें
पारितंत्र में जीव और उनका अजैविक परिवेश परस्पर क्रिया करते हैं। उत्पादक सूर्य की ऊर्जा से भोजन बनाते हैं; उपभोक्ता भोजन-श्रृंखला के अलग पोषण स्तरों पर रहते हैं और अपघटक मृत पदार्थ को सरल पदार्थों में लौटाते हैं। ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है और हर स्तर पर उसका बड़ा भाग ऊष्मा के रूप में उपलब्ध नहीं रहता, इसलिए खाद्य श्रृंखला सीमित रहती है। जैव-निम्नीकरणीय पदार्थ सूक्ष्मजीवों से टूटते हैं, जबकि कुछ अजैव-निम्नीकरणीय पदार्थ लंबे समय तक जमा हो सकते हैं। ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण रोकती है; कुछ रसायन उसके क्षय में योगदान करते हैं।
याद रखने योग्य बातें
- खाद्य जाल कई खाद्य श्रृंखलाओं के जुड़ने से बनता है और जीवों के भोजन संबंधों को दिखाता है।
- पोषण स्तरों के बीच ऊर्जा हस्तांतरण सीमित होता है; 10% नियम एक सामान्य अनुमान है, हर परिस्थिति का सटीक नियम नहीं।
- अजैव-निम्नीकरणीय प्रदूषक खाद्य श्रृंखला में ऊपर जाते हुए जैव-आवर्धित हो सकते हैं।
- ओजोन परत UV किरणों से रक्षा करती है; CFC जैसे पदार्थों ने ओजोन क्षय में भूमिका निभाई है।
पूरा हल किया उदाहरण
प्रश्न: घास में 10,000 J ऊर्जा संचित है। 10% नियम का उपयोग कर घास → टिड्डा → मेंढक → साँप में साँप तक उपलब्ध अनुमानित ऊर्जा ज्ञात करें।
- घास उत्पादक स्तर पर 10,000 J है।
- टिड्डे तक लगभग 10%: 10,000×0.1=1,000 J।
- मेंढक तक लगभग 10%: 1,000×0.1=100 J।
- साँप तक लगभग 10%: 100×0.1=10 J।
उत्तर: 10% नियम के अनुमान से साँप के स्तर तक लगभग 10 J पहुँचेंगे।
इन गलतियों से बचें
- ऊर्जा को पोषण स्तरों में चक्रीय रूप से लौटता मानना; पदार्थ चक्रित होते हैं, ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय है।
- 10% नियम को हर पारितंत्र में सटीक स्थिर अनुपात बताना; यह ऊर्जा-हस्तांतरण का सामान्य अनुमान है।
आधिकारिक स्रोत
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