NCERT अवधारणा अभ्यास · कक्षा 10 · गणित
वास्तविक संख्याएँ
अवधारणा समझें
UPMSP 2026–27 के संख्या पद्धति विषय में अंकगणित का मौलिक प्रमेय और √2, √3, √5 जैसी संख्याओं की अपरिमेयता का अध्ययन है। मौलिक प्रमेय के अनुसार 1 से बड़ी हर पूर्ण संख्या का अभाज्य गुणनखंडन क्रम को छोड़कर अद्वितीय है। अपरिमेय संख्या को दो पूर्णांकों के अनुपात p/q में नहीं लिखा जा सकता।
याद रखने योग्य बातें
- 1 अभाज्य संख्या नहीं है; अभाज्य गुणनखंडन 1 से बड़ी पूर्ण संख्याओं पर लागू होता है।
- अपरिमेयता सिद्ध करते समय p/q को पहले न्यूनतम रूप में मानते हैं।
- विरोधाभास विधि में यदि p और q दोनों सम निकलें, तो p/q न्यूनतम रूप में नहीं था।
पूरा हल किया उदाहरण
प्रश्न: विरोधाभास से सिद्ध कीजिए कि √2 अपरिमेय है।
- मान लें √2=p/q, जहाँ p और q सहअभाज्य पूर्णांक हैं तथा q≠0।
- वर्ग करने पर p²=2q² मिलता है; इसलिए p² और p सम हैं।
- p=2k रखने पर 4k²=2q², अतः q²=2k²; इसलिए q भी सम है।
- p और q दोनों सम होने पर उनमें 2 साझा गुणनखंड है, जो सहअभाज्य होने की धारणा के विरुद्ध है।
उत्तर: यह विरोधाभास बताता है कि √2 को p/q में नहीं लिखा जा सकता; अतः √2 अपरिमेय है।
इन गलतियों से बचें
- √2 का दशमलव अनुमान देखकर उसे अपरिमेय सिद्ध मान लेना।
- विरोधाभास में p और q को पहले सहअभाज्य माने बिना अंत में साझा गुणनखंड को विरोधाभास कहना।
आधिकारिक स्रोत
अब खुद जाँचें: 8 प्रश्न
हर उत्तर के बाद व्याख्या पढ़ें। आपका स्कोर और गलत उत्तर Play वाले ब्राउज़र में निजी रूप से सेव होते हैं।
हिंदी अध्याय क्विज़ शुरू करें →