NCERT अवधारणा अभ्यास · कक्षा 10 · विज्ञान

धातु एवं अधातु

अवधारणा समझें

धातुएँ सामान्यतः चमकीली, तन्य, आघातवर्धनीय तथा ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुओं में प्रायः इसके विपरीत गुण मिलते हैं, हालांकि अपवाद भी हैं। धातु इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाती हैं और अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन; इनके आकर्षण से आयनिक यौगिक बनता है। धातुओं की अभिक्रियाशीलता अलग-अलग होती है। अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है। अयस्क से धातु निकालने, धातुकर्म की मूल विधियों और संक्षारण से बचाव का संबंध इन्हीं गुणों से है।

याद रखने योग्य बातें

पूरा हल किया उदाहरण

प्रश्न: क्या लोहे की कील को CuSO₄ विलयन में डालने पर ताँबा निक्षेपित होगा? समीकरण सहित बताइए।

  1. क्रियाशीलता श्रेणी में Fe, Cu से ऊपर है, इसलिए Fe अधिक क्रियाशील है।
  2. Fe, Cu²⁺ को विलयन से विस्थापित कर सकता है।
  3. आवेश और परमाणु संतुलित कर समीकरण लिखें: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu।
  4. नीले CuSO₄ का रंग हल्का हरा FeSO₄ बनने से बदलता है और कील पर ताँबे की लाल-भूरी परत जमती है।

उत्तर: हाँ। Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu; लोहे की कील पर ताँबा जमता है।

इन गलतियों से बचें

आधिकारिक स्रोत

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